Ai4
शुरुआती प्रोटोटाइप में स्केलेबिलिटी की अनदेखी करने से प्रोडक्शन वर्कफ़्लो क्रैश होते हैं, जिससे निपटने के लिए वर्टिकल एजेंट्स और मॉड्यूलर प्रोटोकॉल्स अपनाना अनिवार्य है।
AI-assisted summary of Harnessing Open-Source AI: Architecting Scalable, Agentic Systems for Production With Fireworks AI — original source. Check the original for full context.
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Detailed notes
## Background यह सत्र Ai4 द्वारा 29 अगस्त 2025 को YouTube पर प्रकाशित किया गया है, जिसमें Fireworks AI की हेड ऑफ डेवलपर रिलेशंस ऐश्वर्या श्रीनिवासन वक्ता के रूप में शामिल हैं। विवरण के अनुसार, यह टॉक ओपन-सोर्स और ओपन-वेट मॉडल्स का उपयोग करके प्रोडक्शन-ग्रेड स्केलेबल एजेंटिक सिस्टम्स के निर्माण, ऑर्केस्ट्रेशन प्रोटोकॉल (जैसे MCP), मॉड्युलर टूल यूज़ और अनुकूलित इन्फ्रेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित एक व्यावहारिक गाइड प्रदान करती है।
## TL;DR इस सत्र में ऐश्वर्या श्रीनिवासन ओपन-सोर्स AI मॉडल्स (जैसे DeepSeek-V3 और GPT-OSS) की बढ़ती क्षमता और एजेंटिक AI के मुख्य आर्किटेक्चरल घटकों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती हैं। वे एंड्रयू एनजी के 4-पिलर फ्रेमवर्क, रीज़निंग, मेमोरी, टूल इंटीग्रेशन और MCP व A2A जैसे आधुनिक एजेंट कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल्स के महत्व को रेखांकित करती हैं। इसके अलावा, वे एंटरप्राइज परिदृश्य में वर्टिकल एजेंट्स के उदय और मल्टी-मॉडल सिस्टम्स में लेटेंसी व थ्रूपुट को मैनेज करने की चुनौतियों पर चर्चा करती हैं। अंततः, वे डेवलपर्स को शुरुआत से ही स्केलेबिलिटी को प्राथमिकता देने और Fireworks AI जैसे तेज़ इन्फ्रेंस इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने की सलाह देती हैं।
## Atmosphere & style इस प्रेजेंटेशन का लहज़ा अत्यधिक व्यावहारिक, तकनीकी और रणनीतिक है, जहाँ वक्ता अपने IBM, Google, Microsoft और Fireworks AI के वास्तविक अनुभवों को साझा करती हैं। समय की कमी और तकनीकी बाध्यताओं के बावजूद ऐश्वर्या की डिलीवरी में जबरदस्त ऊर्जा, स्पष्टता और आत्मविश्वास झलकता है। इसे देखना किसी उच्च-स्तरीय इंजीनियरिंग मास्टरक्लास का हिस्सा बनने जैसा लगता है, जो केवल थ्योरी तक सीमित न रहकर सीधे रियल-वर्ल्ड आर्किटेक्चरल चुनौतियों और प्रोडक्शन की वास्तविकताओं से जोड़ता है।
## Key takeaways - [00:04](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=4s) ओपन-सोर्स और प्रोप्राइटरी मॉडल्स के बीच परफॉर्मेंस का अंतर लगभग खत्म हो चुका है, हालांकि प्रोप्राइटरी मॉडल्स अपनी 'उपयोग में आसानी' (Ease of Use) के कारण शुरुआती MVP निर्माण में अभी भी बढ़त बनाए हुए हैं। - [02:48](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=168s) DeepSeek-V3 और OpenAI के GPT-OSS (20B व 120B) मॉडल्स ने यह साबित किया है कि ओपन-सोर्स मॉडल्स अब प्रोप्राइटरी समकक्षों से बेहतर या उनके बराबर प्रदर्शन के साथ-साथ कस्टमाइज़ेशन और फुल कंट्रोल प्रदान करते हैं। - [04:46](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=286s) किसी AI एजेंट को केवल उसकी 'थिंकिंग' क्षमता से नहीं, बल्कि निर्देशों को समझकर रियल वर्ल्ड टूल्स के ज़रिए टास्क निष्पादित करने की 'डूइंग' क्षमता से आंका जाता है। - [06:22](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=382s) एंड्रयू एनजी के अनुसार आधुनिक एजेंटिक सिस्टम्स 4 मुख्य पिलर्स पर टिके हैं: Reflection (Actor-Critic लूप), Tool Use, Planning (स्टेप डीकम्पोज़िशन), और Multi-Agent आर्किटेक्चर। - [09:22](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=562s) एक स्केलेबल एजेंटिक सिस्टम के 7 कोर कंपोनेंट्स होते हैं: Perception, Planning, Reasoning (CoT/ToT), Memory (Short/Long-term), Tool Use, Learning और Communication। - [09:22](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=562s) बड़ी कॉन्टेक्स्ट विंडो RAG का विकल्प नहीं है; RAG डायनेमिक और विशाल नॉलेज बेस के लिए होता है, जबकि कॉन्टेक्स्ट विंडो केवल एक्टिव वर्किंग मेमोरी है। - [15:23](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=923s) मल्टी-एजेंट सिस्टम्स में कम्युनिकेशन को स्टैंडर्डाइज़ करने और डीबगिंग को आसान बनाने के लिए Anthropic का MCP और Google का A2A SDK जैसे प्रोटोकॉल्स तेजी से अपनाए जा रहे हैं। - [16:31](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=991s) सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के मॉड्यूलर सिद्धांतों का पालन करके ही LLM-पावर्ड ब्लैक-बॉक्स सिस्टम्स में फॉलबैक, रोलबैक और एरर रीप्रोडक्शन को संभव बनाया जा सकता है। - [16:31](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=991s) वर्तमान समय में एंटरप्राइज स्तर पर जनरल-पर्पस एजेंट्स के मुकाबले विशिष्ट डोमेन के 'वर्टिकल एजेंट्स' सबसे तेज़ ROI और बेहतर नियंत्रण (Human-in-the-loop) प्रदान करते हैं। - [18:36](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1116s) जटिल एजेंटिक वर्कफ़्लोज़ में केवल एक मॉडल पर्याप्त नहीं होता; कार्य की जटिलता के अनुसार 5B से लेकर 600B+ पैरामीटर तक के अलग-अलग स्पेशलाइज्ड मॉडल्स को रूट किया जाना चाहिए। - [20:46](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1246s) लेटेंसी का सीधा संबंध मॉडल के आउटपुट से ज्यादा आपके समग्र प्रोडक्ट की गुणवत्ता (Product Quality) और यूजर एक्सपीरियंस से होता है। - [20:46](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1246s) एजेंटिक सिस्टम्स के विकास को मुख्य रूप से 4 चरणों में बांटा जा सकता है: बिल्ड (Build), कस्टमाइज़ (Customize), कंपोज़ेबिलिटी (Composability), और स्केल (Scale)। - [24:27](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1467s) स्केलेबिलिटी को सिस्टम में कभी भी 'बाद का विचार' (Afterthought) नहीं मानना चाहिए; इसे 'Day 1' से ही आर्किटेक्चर की नींव में शामिल करना आवश्यक है।
## Detailed walkthrough ### [00:04](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=4s) इंट्रोडक्शन और ओपन-सोर्स AI का बदलता लैंडस्केप
ऐश्वर्या श्रीनिवासन (Fireworks AI) सेशन की शुरुआत करते हुए ऑडियंस का स्वागत करती हैं। वे बताती हैं कि वे समय से कुछ मिनट पहले ही शुरू कर रही हैं और उन्हें स्लाइड्स बदलने के लिए लैपटॉप के पास ही रहना पड़ेगा। वे अपने बैकग्राउंड का संक्षिप्त परिचय देती हैं कि उनका बैकग्राउंड मशीन लर्निंग और डेटा साइंस का रहा है। उन्होंने पहले IBM, फिर Google और सबसे हाल ही में Microsoft में काम किया। Microsoft में रहते हुए वे जनरेटिव AI एप्लिकेशन्स में गहराई से शामिल हुईं, जहाँ उनका मुख्य काम स्टार्टअप्स को OpenAI मॉडल्स से Azure OpenAI पर स्केलेबल तरीके से माइग्रेट करने के लिए एडवाइस करना था। हाल ही में वे Fireworks AI में शामिल हुई हैं, जो कि जनरेटिव AI एप्लिकेशन्स के लिए एक इन्फ्रेंस प्रोवाइडर (Inference Provider) है। वे ऑडियंस से अनुरोध करती हैं कि यदि उनके कोई प्रश्न हों, तो वे उन्हें नोट करके रख लें ताकि सेशन के बाद चर्चा की जा सके, क्योंकि समय की कमी के कारण अंत में Q&A के लिए समय शायद न बचे।
ओपन-सोर्स मॉडल लैंडस्केप पर चर्चा शुरू करते हुए वे Hugging Face पर उपलब्ध एक रियल-टाइम मॉडल विज़ुअलाइज़ेशन का उल्लेख करती हैं जो लगातार नए मॉडल्स के साथ अपडेट होता रहता है। वे बताती हैं कि अक्सर लोग उनसे पूछते हैं: "अगर ओपन-सोर्स इतना अच्छा हो जाएगा, तो क्या प्रोप्राइटरी मॉडल्स का मार्केट खत्म हो जाएगा?" इसका जवाब "हाँ और ना" दोनों है। पहले फाउंडेशनल मॉडल कंपनियों का सबसे बड़ा 'Moat' (प्रतिस्पर्धी बढ़त) उनका मॉडल परफॉर्मेंस और आउट-ऑफ-द-बॉक्स 'Ease of Use' (उपयोग में आसानी) था। आज ओपन-सोर्स के भारी विकास के कारण परफॉर्मेंस वाला Moat सवालों के घेरे में है, लेकिन किसी MVP या प्रोडक्ट प्रोटोटाइप को तुरंत तैयार करने के लिए प्रोप्राइटरी मॉडल्स की 'Ease of Use' आज भी एक एडवांटेज बनी हुई है।
[02:48](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=168s) DeepSeek-V3 और ओपन-सोर्स मॉडल्स का इन्फ्लेक्शन पॉइंट
ओपन-सोर्स मॉडल्स के इतिहास में DeepSeek-V3 का रिलीज़ होना एक बहुत बड़ा इन्फ्लेक्शन पॉइंट साबित हुआ। एक आदर्श स्थिति वह होती है जहाँ आपको उच्चतम मॉडल परफॉर्मेंस मिले और साथ ही कम लागत (lower cost) तथा अधिक फ्लेक्सिबिलिटी हासिल हो। पहले ओपन-सोर्स मॉडल्स केवल लागत और फ्लेक्सिबिलिटी देते थे, जबकि परफॉर्मेंस के मामले में प्रोप्राइटरी मॉडल्स आगे रहते थे। लेकिन DeepSeek-V3 के आने के बाद ओपन-सोर्स मॉडल्स ने उस सीमा को पार कर लिया और अपने प्रोप्राइटरी समकक्षों से बेहतर या उनके बराबर प्रदर्शन देने लगे।
इसके अतिरिक्त, हाल ही में OpenAI द्वारा GPT-OSS के तहत 20B (20 बिलियन पैरामीटर) और 120B (120 बिलियन पैरामीटर) मॉडल्स लॉन्च किए गए, जो प्रोप्राइटरी मॉडल्स के साथ सीधे मुकाबला कर रहे हैं। ओपन-सोर्स मॉडल्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि डेवलपर्स के पास उनका पूरा कंट्रोल होता है:
- **कस्टमाइज़ेशन और फाइन-ट्यूनिंग**: आप Supervised Fine-Tuning (SFT) या Reinforcement Learning (RL) फाइन-ट्यूनिंग कर सकते हैं। - **होस्टिंग और डिस्टिलेशन**: मॉडल्स को अपनी पसंद के अनुसार डिस्टिल और सेल्फ-होस्ट किया जा सकता है। - **फुल कंट्रोल**: मॉडल को कैसे एक्सेस और सर्व किया जा रहा है, इसका पूरा नियंत्रण यूजर के पास रहता है।
[04:46](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=286s) AI एजेंट क्या है और उसकी ऑटोनॉमी के लेयर्स
ऐश्वर्या ऑडियंस से एक इंटरैक्टिव सवाल पूछती हैं: "कितने लोग मानते हैं कि ChatGPT एक मॉडल है और कितने मानते हैं कि इसमें एजेंटिक क्षमताएं (agentic capabilities) हैं?" वे स्पष्ट करती हैं कि ChatGPT में निश्चित रूप से एजेंटिक क्षमताएं हैं। यह इंस्ट्रक्शन-फॉलोइंग है—अगर आप इसे कुछ करने या न करने का निर्देश देते हैं, तो यह उसे समझता है। उदाहरण के लिए, यदि आप डाउनलोड करने योग्य CSV फाइल मांगते हैं, तो यह टूल्स का उपयोग करके वह फाइल तैयार कर देता है।
एजेंट्स को ऑटोनॉमी (स्वायत्तता) के अलग-अलग लेयर्स के आधार पर परिभाषित किया जाता है। ChatGPT ऑपरेटर, Manus ब्राउज़र या Perplexity के Comet ब्राउज़र जैसे सिस्टम्स में ऑटोनॉमी का स्तर काफी अधिक होता है। किसी सिस्टम को AI एजेंट के रूप में आंकने का सीधा नियम यह है: "क्या यह केवल एक दिमाग (brain) है या इसमें कुछ करने की क्षमता (do capabilities) भी है?" क्या यह आपके निर्देशों को समझकर रियल वर्ल्ड में टास्क रन कर सकता है?
[06:22](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=382s) एंड्रयू एनजी का 4-पिलर आर्किटेक्चर और कंपाउंड AI सिस्टम्स
AI एजेंट्स की कार्यप्रणाली को समझाने के लिए एंड्रयू एनजी (Andrew Ng) द्वारा प्रस्तावित लोकप्रिय 4-पिलर आर्किटेक्चर का उल्लेख किया जाता है:
```mermaid flowchart TD accTitle: Andrew Ng AI Agent Architecture accDescription: Four core pillars of AI agents including Reflection, Tool Use, Planning, and Multi-Agent Systems.
subgraph CorePillars["AI Agent Architecture (Andrew Ng)"] direction TB A["1. Reflection<br/>(Actor LLM + Critic LLM Loop)"] B["2. Tool Use<br/>(APIs, Web, Google Drive, CSV)"] C["3. Planning<br/>(Goal Decomposition & Milestones)"] D["4. Multi-Agent Systems<br/>(Compound AI & Specialized Sub-Agents)"] end
A --> B B --> C C --> D ```
1. **Reflection (रिफ्लेक्शन)**: इसमें आमतौर पर दो अलग-अलग LLMs काम करते हैं—एक 'Actor' जो टास्क परफॉर्म करता है और दूसरा 'Critic' जो आउटपुट को जज करके लूप में लगातार सुधार करता है। 2. **Tool Use (टूल यूज़)**: एजेंट का बाहरी टूल्स से कनेक्ट होना, जैसे Google Drive एक्सेस करना, इंटरनेट ब्राउज़ करना या डेटा टेबल्स को CSV में बदलना। 3. **Planning (प्लानिंग)**: ओपन-एंडेड टास्क मिलने पर एजेंट खुद इंटरमीडिएट स्टेप्स तय करता है। यदि आप इसे केवल "मुझे इसकी समरी दो" कहते हैं, तो समरी की लंबाई, मुख्य बिंदु और एक्सट्रैक्शन के स्टेप्स एजेंट खुद प्लान करता है (चाहे वह सिंगल-स्टेप हो या मल्टी-स्टेप माइलस्टोन्स)। 4. **Multi-Agent Systems (मल्टी-एजेंट सिस्टम्स)**: GPT-5 और आधुनिक सिस्टम्स के पीछे 'Compound AI Systems' का कॉन्सेप्ट काम करता है। इसमें एक राउटर (Router) अप्रोच होती है जो यूजर के टास्क के अनुसार तय करती है कि कब कोडिंग एक्सपर्ट या रीज़निंग मॉडल को बुलाना है और कब विशिष्ट सब-एजेंट्स को टास्क सौंपकर अंत में रिजल्ट एग्रीगेट करना है।
[09:22](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=562s) एजेंटिक AI सिस्टम के 7 कोर कॉम्पोनेंट्स
एक स्केलेबल सिंगल-एजेंट या मल्टी-एजेंट आर्किटेक्चर के सात मुख्य बुनियादी घटक होते हैं:
```mermaid flowchart LR accTitle: Seven Core Components of Agentic Systems accDescription: Workflow breakdown of Perception, Planning, Reasoning, Memory, Tool Use, Learning, and Communication.
subgraph PerceptionPlanning["इनपुट & योजना"] P["Perception<br/>(यूजर इनपुट समझना)"] PL["Planning<br/>(स्टेप्स निर्धारित करना)"] end
subgraph ThinkingMemory["थिंकिंग & संदर्भ"] R["Reasoning<br/>(CoT / ToT)"] M["Memory<br/>(Short-term / Long-term)"] end
subgraph Execution["निष्पादन & संवाद"] T["Tool Use<br/>(LLM-driven API Calls)"] C["Communication & Learning<br/>(MCP / A2A Protocol)"] end
P --> PL PL --> R R --> M M --> T T --> C ```
- **Perception (परसेप्शन)**: यूजर इनपुट को समझना और यह तय करना कि अगला सही कदम क्या होना चाहिए। यह प्लानिंग के साथ मिलकर काम करता है। - **Reasoning (रीज़निंग)**: सिंगल-स्टेप उत्तर के बजाय आंतरिक विचार प्रक्रिया। इसमें Chain of Thought (CoT) — जहाँ मॉडल स्टेप-बाय-स्टेप सोचता है और काउंटर-मॉडल से वैलिडेट करता है — और Tree of Thought (ToT) जैसी हायरार्किकल थिंकिंग शामिल है। DeepSeek-R1 और OpenAI के रीज़निंग मॉडल्स इसी तकनीक का उपयोग करते हैं। - **Memory vs. Context Window (मेमोरी बनाम कॉन्टेक्स्ट विंडो)**: बहुत से लोग मानते हैं कि बड़ी कॉन्टेक्स्ट विंडो होने पर RAG की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन यह गलत है। RAG बहुत बड़े और डायनेमिकली अपडेट होने वाले नॉलेज कॉर्पस के लिए होता है, जबकि कॉन्टेक्स्ट विंडो केवल उस समय की एक्टिव वर्किंग मेमोरी है (जैसे 128k से 131k टोकन्स)। - **Short-Term vs. Long-Term Memory**: मानव मस्तिष्क की तरह एजेंट्स में भी शॉर्ट-टर्म मेमोरी (हाल की बातचीत) और लॉन्ग-टर्म मेमोरी (जैसे यूजर की विशिष्ट राइटिंग स्टाइल, LinkedIn पोस्ट का ड्राफ्टिंग फॉर्मेट जो महीनों पहले सिखाया गया हो) होनी चाहिए। - **Tool Use (हार्डकोडेड बनाम LLM-पावर्ड)**: टूल यूज़ केवल डेटाबेस तक सीमित नहीं है; जैसे मौसम के आधार पर मेनू तय करने के लिए Weather API, Google Drive या Gmail को कॉल करना। आधुनिक एजेंट्स में फंक्शन कॉलिंग LLM-पावर्ड होती है, जहाँ मॉडल खुद संदर्भ समझकर तय करता है कि कब किस API को कॉल करना है, न कि हार्डकोडेड इफ-एल्स कंडीशन्स द्वारा।
[15:23](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=923s) एजेंट कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल्स: MCP और A2A
जब मल्टी-एजेंट वर्कफ़्लो में कोई एरर आता है, तो उसे डीबग करना तभी संभव है जब एजेंट्स के बीच का कम्युनिकेशन सही तरीके से लॉग और ट्रैक हो रहा हो। यदि मॉडल्स के बीच पेलोड और रिस्पॉन्स शेयरिंग का कोई तय मानक नहीं होगा, तो सिस्टम फेलियर का कारण खोजना असंभव हो जाएगा।
हाल ही में इंडस्ट्री में दो प्रमुख प्रोटोकॉल उभरे हैं: - **Model Context Protocol (MCP)**: Anthropic द्वारा शुरू किया गया प्रोटोकॉल, जो टूल्स और डेटा स्रोतों को कनेक्ट करने के तरीके को स्टैंडर्डाइज़ करता है। - **Agent-to-Agent (A2A) SDK**: Google और इंडस्ट्री द्वारा विकसित मानक, जो विभिन्न एजेंट्स और मॉडल्स के बीच आपसी बातचीत और डेटा एक्सचेंज को एक समान प्रोटोकॉल में बांधता है।
[16:31](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=991s) मॉड्युलर मल्टी-एजेंट आर्किटेक्चर और वर्टिकल एजेंट्स का उदय
मल्टी-एजेंट सिस्टम को डिज़ाइन करते समय पारंपरिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के मॉड्यूलर सिद्धांतों का पालन करना बेहद जरूरी है। भले ही बुनियादी LLM एक 'ब्लैक बॉक्स' जैसा व्यवहार करे, लेकिन पूरे सिस्टम को मॉड्यूलर बनाकर आप एरर्स को रीप्रोड्यूस कर सकते हैं, इश्यूज़ को ट्रैक कर सकते हैं और मजबूत फॉलबैक (Fallback) व रोलबैक ऑप्शन्स तैयार कर सकते हैं। सिस्टम में प्लानर एजेंट्स, रिट्रीवर एजेंट्स और एक्ज़ीक्यूटर एजेंट्स को अलग-अलग मॉड्यूल्स के रूप में बनाया जाना चाहिए ताकि स्केलेबिलिटी बनी रहे।
वर्तमान समय में पूरी इंडस्ट्री में जनरल-पर्पस एजेंट्स के बजाय **Vertical Agents** (विशिष्ट डोमेन एजेंट्स) सबसे ज्यादा अपनाए जा रहे हैं:
- **कस्टमाइज्ड और डिस्टिल्ड मॉडल्स**: अभी हम पूरी तरह जनरल-पर्पस इंटेलिजेंस तक नहीं पहुंचे हैं, इसलिए विशिष्ट यूज़-केस के लिए फाइन-ट्यून्ड और डिस्टिल्ड मॉडल्स का उपयोग अधिक प्रभावी है। - **फास्ट ROI (Return on Investment)**: पूरी संस्था को रातों-रात AI में बदलने के बजाय जब कंपनियां किसी विशिष्ट छोटी समस्या या वर्कफ़्लो को ऑटोमेट करने के लिए वर्टिकल एजेंट्स लागू करती हैं, तो उन्हें बिजनेस वैल्यू और निवेश पर रिटर्न (ROI) सबसे तेजी से मिलता है।
[18:36](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1116s) वर्टिकल एआई एजेंट्स और मल्टी-एजेंट सिस्टम्स में स्केलेबिलिटी की चुनौतियाँ
वर्तमान समय में एंटरप्राइज परिदृश्य में वर्टिकल एआई एजेंट्स का दबदबा बढ़ता जा रहा है। हालाँकि आने वाले पाँच वर्षों में स्थिति बदल सकती है और हमें बड़े संगठनों में भी एक साथ कई अलग-अलग कार्यों को संभालने वाले जनरल-पर्पस एआई एजेंट्स देखने को मिल सकते हैं, लेकिन आज के समय में वर्टिकल एजेंट्स अधिक व्यावहारिक हैं। वर्टिकल एआई एजेंट्स के साथ सिस्टम में "ह्यूमन-इन-द-लूप" (Human-in-the-loop) बनाए रखना काफी आसान होता है, और फाइन-ट्यूनिंग पाइपलाइन्स तैयार करके बिना किसी हैल्यूसिनेशन या बॉटलनेक के मॉडल से सटीक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इससे लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) की नॉन-डिटरमिनिस्टिक (non-deterministic) प्रकृति के कारण आने वाली अनिश्चितताओं को नियंत्रित करना संभव होता है।
जब डेवलपर्स एजेंटिक सिस्टम्स का निर्माण शुरू करते हैं, तो वे जल्द ही समझ जाते हैं कि पूरा सिस्टम केवल एक मॉडल एंडपॉइंट पर निर्भर नहीं रह सकता। वर्कफ़्लो की विभिन्न ज़रूरतों के हिसाब से अलग-अलग मॉडल्स को संयोजित (combine) करना पड़ता है — कहीं 5 बिलियन पैरामीटर मॉडल की ज़रूरत होती है, कहीं 70 बिलियन पैरामीटर मॉडल काम कर जाता है, तो कहीं 600 बिलियन पैरामीटर वाले विशाल मॉडल या विशिष्ट बेंचमार्क्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मॉडल्स की आवश्यकता पड़ती है। परंतु जैसे ही आप मल्टी-एजेंट आर्किटेक्चर में इतने सारे मॉडल्स और टूल्स को जोड़ते हैं, सिस्टम को स्केल करना अत्यधिक कठिन हो जाता है। ये जटिल कोडबेस अक्सर लोकल डेव एनवायरनमेंट या क्लाउड डेटाबेस में बिखरे होते हैं, जिन्हें डिबग और स्केल करना बेहद पेचीदा होता है। LLM के अप्रत्याशित आउटपुट की वजह से वर्कफ़्लो किसी भी मोड़ पर टूट सकते हैं।
```mermaid flowchart TD accTitle: Multi-Agent Model Routing and Workflow subgraph InputStage["टास्क और प्लानिंग"] A["यूज़र रिक्वेस्ट / टास्क"] --> B["एजेंटिक ऑर्केस्ट्रेटर"] end subgraph ModelSelection["मॉडल चयन (वर्कलोड के अनुसार)"] B --> C["5B पैरामीटर मॉडल<br/>(लाइटवेट / फास्ट टास्क)"] B --> D["70B पैरामीटर मॉडल<br/>(स्टैंडर्ड रीजनिंग)"] B --> E["600B+ पैरामीटर मॉडल<br/>(जटिल डोमेन वर्कफ़्लो)"] end subgraph Execution["एक्ज़ीक्यूशन व टूल यूज़"] C --> F["टूल इंटीग्रेशन व API"] D --> F E --> F F --> G["ह्यूमन-इन-द-लूप / आउटपुट"] end ```
- **स्केलेबिलिटी का माइंडसेट**: चाहे कोई स्टार्टअप हो या एंटरप्राइज में बजट हासिल करने के लिए प्रोटोटाइप बना रही टीम, स्केलेबिलिटी को पहले दिन ("Day 1") से ही ध्यान में रखकर चलना चाहिए। - **अपेक्षित लोड**: सिस्टम को यह मानकर डिज़ाइन करना आवश्यक है कि इसे लाखों लोग इस्तेमाल करेंगे या प्रति मिनट कम से कम 100,000 टोकन्स प्रोसेस करने होंगे, ताकि सिस्टम पूरी तरह रोबस्ट और विश्वसनीय बना रहे।
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[20:46](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1246s) एजेंटिक सिस्टम्स का आर्किटेक्चर: लेटेंसी, थ्रूपुट और इंफ्रास्ट्रक्चर
प्रोडक्शन-ग्रेड एजेंटिक सिस्टम्स के आर्किटेक्चर को डिज़ाइन करते समय लेटेंसी और क्वालिटी के संबंध को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर डेवलपर्स इस बात से भ्रमित हो जाते हैं कि लेटेंसी कम करने से मॉडल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। असल में लेटेंसी का सीधा संबंध मॉडल के रिस्पॉन्स की गुणवत्ता से नहीं, बल्कि आपके द्वारा बनाए जा रहे **प्रोडक्ट की समग्र गुणवत्ता** ("latency equates to the quality of the product") से होता है। जब भी मॉडल प्रोवाइडर्स नया मॉडल जारी करते हैं, तो उनका मुख्य उद्देश्य आउटपुट क्वालिटी से समझौता किए बिना लेटेंसी को न्यूनतम करना होता है, ताकि यूज़र को तुरंत रिस्पॉन्स मिल सके।
इसके अलावा, थ्रूपुट और कॉन्करेंसी यह निर्धारित करते हैं कि मॉडल्स प्रति सेकंड कितनी रिक्वेस्ट्स संभाल सकते हैं और सिस्टम कितना स्केलेबल है। वैश्विक ग्राहकों (global customers) के लिए काम करते समय टेलर्ड और सिक्योर इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है, जहाँ कुछ कंपोनेंट्स ऑन-प्रेमिस (on-prem), कुछ प्राइवेट क्लाउड और कुछ पब्लिक क्लाउड में हाइब्रिड रूप से डिप्लॉय किए जा सकें। किसी भी एजेंटिक सिस्टम को विकसित करने की रूपरेखा मुख्य रूप से चार चरणों में विभाजित की जा सकती है:
```mermaid flowchart LR accTitle: Agentic AI Lifecycle A["1. बिल्ड<br/>(डेव एनवायरनमेंट)"] --> B["2. कस्टमाइज़<br/>(प्रोपराइटरी डेटा / फाइन-ट्यूनिंग)"] B --> C["3. कंपोज़ेबिलिटी<br/>(मल्टी-मॉडल, APIs, डेटाबेस)"] C --> D["4. स्केल<br/>(सिक्योर, रिलायबल प्रोडक्शन)"] ```
- **बिल्ड (Build)**: डेवलपमेंट एनवायरनमेंट तैयार करके बेसिक्स पर काम शुरू करना। - **कस्टमाइज़ (Customize)**: उद्योग-विशिष्ट यूज़ केस और प्रोपराइटरी डेटा के अनुसार मॉडल्स को ट्यून करना। - **कंपोज़ेबिलिटी (Composability)**: मॉडल्स को विभिन्न डेटाबेस, APIs और मल्टी-मोडैलिटी के साथ जोड़ना ताकि मॉडल अपने इनहेरेंट कॉन्टेक्स्ट से आगे विस्तार कर सके। - **स्केल (Scale)**: पूरे सिस्टम को सुरक्षित, स्थिर और हाई-परफॉरमेंस तरीके से बड़े पैमाने पर तैनात करना।
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[22:45](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1365s) Fireworks AI का बैकग्राउंड और डेवलपर रिसोर्सेस
Fireworks AI एक अत्याधुनिक लार्ज लैंग्वेज मॉडल इनफेरेंस प्रोवाइडर है, जो इंडस्ट्री में सबसे तेज़ और सबसे कुशल (fastest and most efficient) मॉडल होस्टिंग सेवा प्रदान करने के लिए जाना जाता है। कोई भी नया ओपन-सोर्स मॉडल आते ही Fireworks AI पर "Day 1" से उपलब्ध हो जाता है — जिसमें DeepSeek-R1, DeepSeek-V3 और OpenAI के नवीनतम ओपन मॉडल्स शामिल हैं।
Fireworks AI की कोर टीम और लीडरशिप के पास गहरा तकनीकी अनुभव है। टीम में पूर्व Google और पूर्व Meta के इंजीनियर शामिल हैं, जिनमें PyTorch के मूल निर्माता भी शामिल हैं। यही गहन इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञता कंपनी का सबसे बड़ा "मोर्ट" (moat) है, जिससे मॉडल्स को अधिकतम गति और दक्षता के साथ सर्व किया जा सकता है।
- **वेबिनार की जानकारी**: OpenAI के ओपन-सोर्स रिलीज़ (जैसे GPT OSS) पर एक विस्तृत 30-मिनट का डीप-डाइव वेबिनार आयोजित किया जा रहा है। - **डेवलपर क्रेडिट्स**: ओपन-सोर्स बनाम प्रोपराइटरी मॉडल्स के प्रदर्शन को स्वयं परखने के लिए डेवलपर्स दिए गए फ़ॉर्म को भरकर अपने अकाउंट में **$50 का मुफ़्त क्रेडिट** प्राप्त कर सकते हैं। - **कनेक्ट व सपोर्ट**: यदि प्रेजेंटेशन के दौरान स्क्रीन फ़्लिकरिंग या अन्य तकनीकी दिक्कतों के कारण कोई स्लाइड छूट गई हो, तो डेवलपर्स सीधे LinkedIn पर संपर्क करके अपने सवाल पूछ सकते हैं या अतिरिक्त क्रेडिट्स का अनुरोध कर सकते हैं।
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[24:27](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1467s) डे वन से स्केलेबिलिटी को प्राथमिकता देने की सीख
सत्र के अंत में इस मुख्य संदेश को दोहराया गया कि एजेंटिक एआई सिस्टम्स का निर्माण करते समय स्केलेबिलिटी को कभी भी एक बाद का विचार ("afterthought") नहीं माना जाना चाहिए। माइक्रोसॉफ्ट में काम करने के अपने पिछले अनुभवों का उदाहरण साझा करते हुए वक्ता ने बताया कि कैसे अनगिनत स्टार्टअप्स शुरुआत में अपने MVP (Minimum Viable Product) के लिए बहुत ही बुनियादी तरीके से OpenAI APIs का उपयोग करते हैं। अचानक जब प्रोडक्ट लोकप्रिय हो जाता है और यूज़र बेस सैकड़ों से बढ़कर हज़ारों में पहुँच जाता है, तो उनका पूरा सिस्टम क्रैश होने लगता है और वे स्केल नहीं कर पाते। उस समय वे हड़बड़ी में क्लाउड माइग्रेशन और समाधान तलाशते हैं।
चाहे आप किसी एंटरप्राइज में काम कर रहे हों, एक सोलो फाउंडर हों या एक उभरते हुए उद्यमी, शुरुआत से ही स्केलेबिलिटी को अपनी वास्तुकला की नींव में शामिल करना अनिवार्य है। जब आर्किटेक्चर पहले दिन से बड़े वर्कलोड को संभालने के लिए तैयार होगा, तभी एक टिकाऊ और सफल एजेंटिक सिस्टम खड़ा किया जा सकता है।
## Notable quotes > [00:04](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=4s) अगर ओपन-सोर्स इतना अच्छा हो जाएगा, तो क्या प्रोप्राइटरी मॉडल्स का मार्केट खत्म हो जाएगा? — ऐश्वर्या श्रीनिवासन
> [00:04](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=4s) Ease of Use — ऐश्वर्या श्रीनिवासन
> [04:46](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=286s) कितने लोग मानते हैं कि ChatGPT एक मॉडल है और कितने मानते हैं कि इसमें एजेंटिक क्षमताएं (agentic capabilities) हैं? — ऐश्वर्या श्रीनिवासन
> [04:46](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=286s) क्या यह केवल एक दिमाग (brain) है या इसमें कुछ करने की क्षमता (do capabilities) भी है? — ऐश्वर्या श्रीनिवासन
> [06:22](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=382s) मुझे इसकी समरी दो — ऐश्वर्या श्रीनिवासन
> [18:36](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1116s) ह्यूमन-इन-द-लूप — ऐश्वर्या श्रीनिवासन
> [18:36](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1116s) Day 1 — ऐश्वर्या श्रीनिवासन
> [20:46](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1246s) latency equates to the quality of the product — ऐश्वर्या श्रीनिवासन
> [24:27](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc&t=1467s) afterthought — ऐश्वर्या श्रीनिवासन
## Mentioned Aishwarya Srinivasan, Fireworks AI, IBM, Google, Microsoft, OpenAI, Azure OpenAI, Hugging Face, DeepSeek-V3, DeepSeek-R1, GPT-OSS, ChatGPT, Manus, Perplexity, Comet, Andrew Ng, GPT-5, Model Context Protocol (MCP), Anthropic, Agent-to-Agent (A2A) SDK, Meta, PyTorch, LinkedIn
## Video description Aishwarya Srinivasan, Head of Developer Relations - Growth, Fireworks AI
Abstracts
Open-source model weights are merely the foundation. In this session, we’ll dive into how both startups and large organizations can transform these models into production-grade agentic systems. Agentic AI is only as useful as its ability to perform in production. This talk offers a tactical guide to building agentic systems with open-weight models- focusing on orchestration protocols (like MCP), modular tool use, and inference infrastructure optimized for speed, cost, and output quality. We’ll move beyond theory and explore how startups and enterprises can architect scalable, reliable agents that connect to real tools and ship to real users, using the open-source stack.
[Source](https://www.youtube.com/watch?v=zUkm0lBEQfc)